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जुआरी की किस्मत बनाम किस्मत का दरवाजा बैंकाक के एक कैसीनो में एक आदमी जुआ खेल रहा था. बदकिस्मती से, वह सब कुछ, अपनी पाई-पाई हार गया. निराशा की स्थिति में उसे शौच की इच्छा हुई और वह शौचालय की ओर गया. वहाँ देखा कि शौचालय का दरवाजा एक रुपये का सिक्का डालने पर खुलता है. वह परेशान दरवाजे के सामने खड़ा रहा. तभी एक दूसरे आदमी ने उसकी परेशानी देखी और उसे एक रुपये का सिक्का दिया. पराजित जुआरी कृतज्ञ था. उसने उस मददगार का नाम और पता नोट किया और उससे वादा किया कि, चाहे कुछ भी हो जाए, वह किसी न किसी दिन उसका कर्ज चुका देगा. उस मददगार के जाने के बाद, जब उसने सिक्का दरवाजे के छेद में डालने की कोशिश की तो पाया कि दरवाजा तो पहले से ही खुला हुआ था. संयोग से, उससे पहले जब कोई और वहाँ से निकला था, तो उसने पीछे दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया था और वह खुला रह गया था. खैर, जब जुआरी शौचालय से बाहर निकला और लॉबी में पहुँचा, तो उसके पास उधार लिया हुआ एक रुपया अभी भी था. आदतन, जुआरी ने वह रुपया दाँव पर लगा दिया और चालीस रुपये जीत गया. उसकी किस्मत ने करवट बदली और उस रात उसने न सिर्फ अपने हारे हुए एक लाख रुपये जीत लिए, बल्कि साढ़े पाँच लाख रुपये ऊपर से और भी जीत लिए. फिर वह जुआरी प्लेन से मुम्बई आ गया और उन पैसों से एक छोटा-सा फास्ट फूड ठेला खोल लिया. किस्मत से उसकी छोटी-सी दुकान खूब चली और कुछ ही दिनों में वह एक बड़े रेस्टोरेंट का मालिक बन गया. रेस्टोरेंट इतना सफल हुआ कि, कुछ ही सालों में उसने भारत के अन्य 15 बड़े शहरों में वैसे ही रेस्टोरेंट खोल लिए और अगले कुछ सालों में एक पाँच सितारा डीलक्स होटल भी खरीद लिया. फिर दो होटल, फिर तीन होटल, फिर विदेश में होटल खोल लिए. वृद्धावस्था में, एक बार उसने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में अपनी सफलता की कहानी सुनाते हुए अत्यंत भावुक स्वर में कहा, " मेरे साथ जो चमत्कार हुआ, वह एक आदमी की वजह से हुआ, सिर्फ एक आदमी की वजह से। अगर आज वह आदमी मुझे मिल जाये, तो मैं उसे सोने, हीरे-जवाहरातों से तौल दूँगा." "उस आदमी को..." तभी एक डायरेक्टर ने कहा ".... जिसने आपको बैंकाक के उस कैसीनो में शौचालय का दरवाजा खोलने के लिए एक रुपया दिया था ? " 🤔 "नहीं, वह नहीं. मेरे पास तो उसका नाम-पता सब है और उसका एक रुपया मैं उसे लौटा चुका हूँ. मैं तो उस आदमी को ढूँढ रहा हूँ, जिसने शौचालय का दरवाजा खुला छोड़ दिया था." 🤣

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