चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
नवरात्रि के छठे दिन आदि शक्ति के अत्यंत पराक्रमी स्वरूप माँ कात्यायनी के चरणों में सादर प्रणाम। माँ का यह दिव्य रूप भय और शत्रुओं का नाश कर जीवन में ओज व तेज प्रदान करता है।
महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर माँ ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, जिससे वे 'कात्यायनी' कहलाईं।
देवताओं के तेज से प्रकट होकर माँ ने अत्याचारी राक्षस महिषासुर का वध किया और चराचर जगत को मुक्त कराया।
सिंह पर सवार माँ के एक हाथ में तलवार (चन्द्रहास) और दूसरे में कमल है, जो शक्ति और कोमलता का अद्भुत प्रतीक है।
आइए, माँ का ध्यान कर सुख-समृद्धि का आशीष मांगें🙏
ॐ देवी कात्यायनी नमः 🌺🙏🚩
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