सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
नौ दुर्गा स्वरूपों में पाँचवीं देवी माँ स्कंदमाता, भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं। वे सिंह पर आरूढ़, चतुर्भुजा रूप में विराजमान हैं—दोनों हाथों में कमल धारण किए, एक हाथ वर मुद्रा में और गोद में बालक स्कंद को लिए हुए। उनका यह स्वरूप मातृत्व की ममता और शक्ति की दिव्यता का अद्भुत संगम है।
नवरात्रि के पाँचवें दिन उनकी पूजा की जाती है। माँ स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख, भय से मुक्ति, ज्ञान की प्राप्ति, बाधाओं का नाश और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।
माँ भक्तों पर अपनी ममतामयी दृष्टि बनाए रखती हैं और उन्हें साहस तथा सुरक्षा प्रदान करती हैं।
ॐ देवी स्कंदमातयै नमः 🙏🚩
माँ स्कंदमाता सबका कल्याण करें और अपने आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति का संचार करें।
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