Gen-Z आंदोलन का मोती कांग्रेस ने नेहा बोरा के रूप में चुन लिया है, बाक़ी के कचरे से किसी को मतलब नहीं है। कुछ दिनों बाद भले ही बोरा जी इनसे उमर ख़ालिद के नारे लगवा दे। अभी चमक रहीं है।
बीजेपी को भी समझ आ गया है की दीपके रंका इत्यादि के पास कोई जन समर्थन नहीं है, आपिया अवसरवादिता जल्द ही एक्सपोज़ हो जाती है। ये तिलचट्टे भी ऐसी ही राजनीति में पैदा हुए थे। इसीलिए अब इनको कांग्रेस से भिड़ा के कुछ खास हासिल होगा नहीं, बस ये बड़बोले कोर वोटर को गुस्सा दिलाने के लिए ही पाले जायेंगे, ताकि ये वोटर और ज़्यादा लामबंद हो जाये।
आलसी कांग्रेसी एक रैली को १ महीना सेलिब्रेट करेंगे , रील काटेंगे, बॉस को ख़ुश रखेंगे। बाबा ने बहुत मेहनत कर ली है, अब एक फॉरेन ट्रिप उन्होंने अर्न कर ली है। SIR प्रक्रिया चलती रहेगी, इंडियन एक्सप्रेस भी हाँथ खींच रहा, सुप्रीम कोर्ट भी हल्का फुलका कंसर्न दिखायेगा। गलतिया सुधारने बोलेगा। ऐसा माहौल बनाया जाएगा, की बुरारी जाने की नौबत ना आए।
“ब्रो वेयर दा फ़क इज बुरारी”
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