एक और अंग्रेज़ छात्रों को उकसाते हुए, यह हमारा समाज कहाँ जा रहा है? इस राष्ट्र को दुर्जनों की दुर्जनता से उतनी हानि नहीं हुई है, उससे अधिक इस राष्ट्र को सज्जनों की निष्क्रियता और मौन से हुई है।🇮🇳