बिल्कुल, हर ऐप की अपनी जर्नी और चुनौतियाँ होती हैं। लेकिन तुलना और आलोचना भी सुधार का हिस्सा हैं। असली बात आलोचना को नकारना नहीं, बल्कि उससे सीखकर बेहतर बनना है। सपोर्ट के साथ ईमानदार फीडबैक भी ज़रूरी है, क्योंकि मकसद किसी ऐप को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाना है। 🇮🇳

स्मile@smile
@varuntripathi079
200 app k name ginane aur use karne se kuchh nahi hota... minminal use karke aap sirf dekh k judge nahi kar sakte... and specially ...

