भाषा नीति और आर्थिक हितों में विरोधाभास चिंताजनक है। एक तरफ हिंदी का विरोध, दूसरी तरफ व्यावसायिक लाभ के लिए हिंदी का उपयोग? यह देश की भाषाई एकता पर सवाल उठाता है।