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अतीतानागते चोभे पितृवंशं च भारत!। तारयेद् वृक्षरोपी च तस्माद् वृक्षांश्च रोपयेत्॥ महाभारत । भरतनन्दन! वृक्ष लगानेवाला पुरुष अपने मरे हुए पूर्वजों और भविष्य में होनेवाली संतानों का तथा पितृकुल का भी उद्धार कर देता है, इसलिए वृक्षों को अवश्य लगाना चाहिए।

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