#एक_कहावत_है –कलयुग में झूठे को स्वीकार किया जाता है और सच का शिकार किया जाता है …
इसका कारण कलयुग नहीं काल्पनिकता है और यहीं तो हो रहा है समाज में जीवन के कड़ कड़ के कदम कदम में हर जगह हर परिस्थितियों में क्योंकि हम उस काल्पनिकता से बाहर नहीं निकल पा रहे है आज के इस भू मंडल में दूर दूर तक हकीकत से परे कोई व्यक्ति नहीं है जो सच को स्वीकार करे सच का साथी हो सच की बात करे क्योंकि कही न कही काल्पनिकता से घिरा होता है कही रिश्तों को बनाए रखने के लिए , तो कभी सच का सामान न कर पाने की वजह से , तो कही अपने स्वयं के महत्वकांक्षा के लिए , तो कही चापलूसी के लिए ,तो कही घृणा द्वेष भाव वगैरा वगैरा क्योंकि जब तक व्यक्ति काल्पनिकता में जिएगा वो सच को स्वीकार ही नहीं कर सकता न सच बोल सकता न ये कलयुग तो वैसे ही बदनाम है कारण तो काल्पनिकता का हावी होना है ,और ये आप हम सब के ऊपर लागू होता है और इसी से हम सब घिरे है न आप सच का साथ दे सकते न हम ,क्योंकि हम जब पैदा होते है तो हमे दो तरह का पाठ पढ़ाया जाता है दो रहा कि बाते बताई जाती है , पहला भाई कितना बड़ा दुश्मन क्यों न हो भाई के साथ गद्दारी नहीं करना चाहिए क्योंकि भगवान को भी ऐसा पसंद नहीं है , एक तरह उसी भाई विभीषण को कोसते है की भाई के साथ छल किया वो परिवारघाती , फिर राम को पूजते भी है जिन्होंने विभीषण के साथ मिलकर जबकि जो भाई के साथ गद्दारी किया उसके राम समर्थक रहे साथ लिया मतलब एक भाई से भाई के साथ छल किया फिर या तो राम जी के अनुवाई गलत है या फिर भाई के साथ गलत करने को कहने वाले लोग जबकि दोनों बातों को एक ही व्यक्ति दो तरह से कह रहा होता है क्योंकि वो भी काल्पनिकता से परे है सच को स्वीकार करने की क्षमता नहीं है , इस लिए सच और सही के फर्क में न पड़े तो ही अच्छा है क्योंकि इस संसार में इस भव सागर में मोह माया की काल्पनिक दुनिया में ऐसा कुछ नहीं मिलने वाला न कोई सच का साथी है न कोई गलत के खिलाफ है तो काल्पनिक रिश्ते क्योंकि बात जब अपने अपनो चाहने वालों की होती है तो लोग गलत को सही और सही को गलत साबित कर देते है यही इस कलयुग की सच्चाई है और यही देखने को #वर्चस्व को हर जगह मिलता है ।
लेख काल्पनिकता के हकीकत के उजागर करने हेतु लिखी गई है इसका काल्पनिकता से कोई लेना देना नहीं
🫵 लेख कलयुग और काल्पनिकता को परिभाषित करती है वर्चस्व की कलम से ✍️


